गुरुवार, 2 जुलाई 2020

सवाल और जिन्दगी


वो मूरत कैसी थी ?
वो जाने कैसा था पत्थर ?
वो सूरत कैसी थी ?
इसका ना मिला उतर ,
 
वो आँख कैसी थी?
वो थी कैसी चमक ?
वो खुशी कैसी थी ?
सुन खो गयी दमक .
 
वो सवाल कैसे थे  ?
वो जवाब कैसे थे ?
वो हाल कैसे थे ?
सुन  बेहाल हों गये .
 
उसके कुछ  सवालों के,
मैंने ढूढे जवाब खूब ,
अपने सवालों में,
मै उलझा रहा  खूब ?
 
बस इन सवालों से ही ,
चल रही है जिन्दगी,
गम की सेज पे मुस्कुरा के ,
पल रही है ये अभी !!

बुधवार, 1 जुलाई 2020

किसको खुदा और किसको तुम भगवान कहते हो ??



कभी हिन्दू तो कभी खुद को मुसलमान  कहते हो
जो कुछ बोलता नही उसे खुदा तो कभी तुम्ही भगवान कहते हो ?

जो खून से खेलता  है उसे तुम हैवान कहते हो
तो फिर किस वजेह से खुद को तुम इन्सान कहते हो ?

किसी पत्थर का कोई धर्म नही होता ,
चाहो शिव मान कर पूजा कर लो या फिर इसे मस्जिद के गुम्बद पे लगा दो ,

मरने के बाद किसी को  स्वर्ग और जन्नत में भेजने वालों
क्यूँ कहते हो कि लाश को  दफना दो या फिर आग    लगा दो  ?

खाने को तो  कसमे खाई जाती हैं इमां के सौदे में भी तो
आखिर किस ईमान को तुम मुकम्मल   ईमान कहते हो ?

बे वजह  कि उलझनों में  उलझ के रहते हो  खुद यहा
और इसे धर्म के नाम पर दिया गया इम्तिहान कहते हो  ,

जो खुद ही खुदा है  और  जो भगवान है खुद ही
उसकी  रखवाली   में  आखिर क्यूँ खुद को परेशान कहते हो ?

सरहदों में बाँटना है तो सर उठा के देख लो ऊपर
और इसे बाँटो जिसे तुम आसमान कहते हो  ,

एक दिन कहा था आकर के भगवान ने मुझसे    ' ऐ राजीव' !
"  उसे रोटी -  कपडा दो जिसे तुम  भूखा-नंगा इन्सान कहते हो .

 बताओ प्रेम से " हिन्दू नही मुस्लिम नही बस   इन्सान ही हो तुम  "
तो उस के लिए तो  तुम्ही  खुदा हो और भगवान ही हो  तुम ....................

मंगलवार, 30 जून 2020

स्त्री तेरी यही कहानी


तू चीखेगी तो,
जुबान काट दी जाएगी,
जब सुलगेगी ,
तो जला दी जाएगी,
तू कमजोर बनी रह ,
और पुरुष तुम्हे गुलाम बनाये रखे,
क्या यही तुम्हारे हिस्से में है ?

सही वक़्त है ,
उठ !
जाग !
रुढियों को लगा दे आग,
या तो तू तोड़ दे ,
जंजीरों को ,
या फिर कर  इन्तजार ,
जब तू फिर से
व्यभिचार कि नाली में बहा दी जाएगी !



सोमवार, 29 जून 2020

मै मरघट में जब जाता हूँ


मै   मरघट  में  जब  जाता  हूँ  ,

 मै  मर-घट  में  मर  जाता  हूँ  ,

 जब  मर  और  घट  न  घट  पाए..

  तो  खुद  ही  मै  घट  जाता  हूँ .//



मै  मरघट   को  समझाता  हूँ ,

 कि   मर  के  घट  न  पाउँगा  मै ,

 तुझे  आज  ये  बताता  हूँ  ,

 कि  कर  तू  मेरा  इंतजार...

  अभी  मै  कुछ  देर  बाद  मरघट  पे  आता  हूँ  ,



 ऐ  मरघट   तू   मुझे  क्या  जाने  ??

 मै  हूँ  इन्सान  एक  मरघट  का  ,

जो  मरघट  पे  तो  आता  है  ..

 पर  अपने  पीछे  एक  अद्भुत ,अविचल ,यथार्थ और

अविश्वसनीय   इतिहास  छोड़  वो  आता  है ........................


रविवार, 28 जून 2020

क्षितिज के उस पार

 
तुम  बुलाते हो,
 क्षितिज के उस पार से ,
हमे  वक़्त नही मिलता है,
खेते हुए पतवार से,
 एक कोशिश है,
 जो मुझे उस पार लेके जाएगी ,
शायद यही सोच ,
तुमसे मिलने के ,
इन्तजार में ,
हसीं स्वप्न   की तरह से जिन्दगी गुजर जायेगी ......

शनिवार, 27 जून 2020

बिक रहे हैं कौड़ियों के मोल कफ़न आज भी


 
मौत  देखिये  इंसानियत  से डर रहा है आज भी ,
रखवालों के हाथ में खंजर रहा है आज भी ,
 
खुद को मारा है इन्सान ने, अपने  जमीरों को दे सजा ,
कि आँखों के सामने उसके,लाशों का मंजर रहा है आज भी ...
 
जिन दरख्तों से काट दी हमने हजारों  डालियाँ ,
उन दरख्तों की गवाही देखिये कि, वहां बंजर रहा है आज भी,
 
खुद की तबाही का सबब जब रहा है तू यहाँ ,
फिर क्यूँ रोता हुआ , रात भर रहा है आज भी ??
 
हो रहे हैं सर कलम इंसानियत और ईमान के,
बिक रहे हैं देखिये जनाजे और कब्र इन्सान के ,
 
देख के मुस्कुरा रहे हम अपना ही दफ़न आज भी
बिक रहे हैं कौड़ियों के मोल कफ़न आज भी .........

शुक्रवार, 26 जून 2020

चूल्हे जलेंगे जरुर

चूल्हे जलेंगे जरुर ,
चाहे दस हजार रूपये में ,
बिकने लगे सिलिंडर ,
चाहे कोई आये ,
चाहे कोई जाये ,
चाहे कोई चिल्लाये ,
कोई दुश्मन बन जाये ,
या फिर कोई रहनुमा हो जाये ,
पर जलेगा सिलिंडर ,
जैसे देश जल रहा है !
आग में !

जो मालिक बनता है ,
वो भाग जाता है ,
जो अभी नही बना ,
वो ललचाता है ,
जो जमाने से है ,
वो तिल तिल जलाता है ,
मानो गरीबी नही ,
चिता जल रही हो ,
वो दांत निपोरते हैं ,
गरीबी खत्म करेंगे ,
और जोरदार बहस होती है ,
राजधानी के ,
सबसे महंगे होटल के,
सबसे महंगे हॉल में ,
मानो गरीबी का चीर हरण हो रहा हो ,
और वो,
जिनके यहाँ सुबह से सिलंडर की वजह से,
खाना नही बना ,
राम लाल लाइन में लगा है ,
धोती बांध के खिसका रहा है सिलंडर को ,
उसके घर में लाइव देख रही है ,
उसकी मोहिनिया ,
और सोच रही है ,
कि ये जो जोर जोर से बोल रहा है ,
यही आएगा अगली बार सता में ,
और सस्ता सिलिंडर देगा,
तभी रोने लगता है ,
भूख से ,
उसका छोटू ,
माँ-माँ रोटी- रोटी कह के ,
नही नही सिलिंडर सिलिंडर
चिल्ला के !
पर जलंगे जरुर चूल्हे ,
और जला दिए जाएंगे,
अरमान लाचारी के ,
खुद की रोटी सेंकने के लिए !
जलेंगे जरुर चूल्हे !!!

गुरुवार, 25 जून 2020

बस यूँ ही !


याद है तुमने कहा था ,
हाथों की लकीरों में कुछ नही है ,
और मै थाम के बैठा रहा था
तुम्हारी हाथों को ,
कि तुम्हारी हाथों की लकीरों में ,
कुछ भर दूँ ,
थोडा स्नेह ही सही ,
मेरे पास कुछ भी तो नही ,
तुम्हे देने को ,
पर फ़िर भी ,
जब भी सिहरन महसूस होगी ,
या फिर ये एहसास ,
कि हाथों को दबाये कोई ,
तो मिलूंगा अतीत के झरोखों में ,
स्नेह के साथ,
बस यूँ ही !!!....
प्रेम नही
एक एहसास बस ,
और कुछ भी तो नही ,
बस यूँ ही !!

बुधवार, 24 जून 2020

रिश्तों की जिल्दों को बिखरने न दिया !

वक़्त की शाख पे टूटे जो उम्मीद कभी,
खुद की उम्मीदों को कभी गिरने न दिया ,
हजार बार खुद गिरा ,खुद को उठाया मैंने ,
सफ़र में खुद को कभी भी बिखरने न दिया !
कभी खुद की जिद में तोडा खुद को बहुत ,
जिन्दगी की धुप ने अक्श को निखरने न दिया ,
"माहिर " जीता नही जिन्दगी किताबों की तरह ,
पर जिन्दा रिश्तों की जिल्दों को बिखरने न दिया !

"चमन- बहार" रिव्यु


"चमन- बहार"
रिव्यू

सबसे पहले बात कर लेते हैं ,फिल्म के नायक की ही ।

वेब सीरीज के इस दौर में,चाहे कोटा फैक्टरी के जीतू भईया हों या फिर पंचायत के सचिव जी , एक्टर  के रूप में अपने संजीदा अभिनय का लोहा मनवाते हुए जितेंद्र कुमार यह लगातार साबित कर रहे हैं, कि वे इस समय में डिजिटल परदे के जितेंद्र साबित हो रहे हैं।
इस कड़ी में चमन बहार के बिल्लू बन के वह अपनी दावेदारी और मजबूत कर रहे हैं।  

रिंकू जो किसी अधिकारी की बेटी होती है ,वो जब एक गाँव से सटे कस्बे में अपने पिता के साथ शिफ्ट होती है, तो गाँव -कस्बों  के कितनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनती है । यह कहानी रिंकू ( रीतिका बदलानी ) के प्रेम में पड़े तमाम लफंडर,नेता टाइप और टपोरियों के आशिक मिजाजी की कहानी भी है। 



मुकम्मल प्रेम की कहानियाँ तो जमाने से कही जाती रही है, लेकिन अधूरे प्रेम की कहानी कहना हमेशा से ही थोड़ा चैलेंजिंग रहा है।
चमन बहार भी ऐसे ही प्रेम की एक कहानी है , जिसे आप अपने अंदर होते हुए महसूस करते हैं।  फिल्म देखते हुए आपके अंदर का बिल्लू कई बार जगता है। 

आप अगर गाँव से हों या शहर से, आप इस कहानी को अपने अंदर महसूस कर पाते हैं, अगर गाँव के हों तब तो समझिये आपकी जाने कितनों पलों की गवाही की कहानी को ही कह दिया है बिल्लू ने। 

जमाना चाहे कितना भी बदल जाए, प्रेम का रूप कस्बों और कुछ   इलाकों में उतना पेशेवर नहीं हुआ है, इस बात की गवाही है चमन बहार। एक तरफ़ा  प्रेम की इस कहानी में प्रतिस्पर्धा, जलन, इर्ष्या को दिखाना सबसे कठिन काम होता होगा शायद, लेकिन इसे जितने मजेदार तरीके से दिखाया गया है, कि आपको नायक के प्रति प्रेम हो जायेगा। 

प्रेम के एक दौर में जहाँ पत्थरों पर दिल में तीर मार के दर्शाने का रिवाज, हाथों पर नाम गुदाने का जुनून और किसी के प्रति भावों को एक लम्बे समय तक लेके चलने का जुनून जब ग्रीटिंग पर लिखे नाम में बदलने लगता है यह, कहानी उस दौर की है। 
यह उस दौर की कहानी है जब आप स्कूटी का पीछा एवन साईकिल से कर देते हैं। 

प्रेम हासिल न  होने पर प्रेम का हसीन दौर कैसे  दौरे और पागल पन को छु बैठता है ,यह गाथा उसे दौरे का भी है। 

छोटू और सोमु दो पात्र आपको हर शहर हर गाँव और कस्बे में मिल जायेंगे जो  शिला भईया और आशु भइया के साथ कहानी को आगे बढ़ाते हैं। 


क्या बिल्लू को उसका प्रेम हासिल हो पाता है ? 
क्या रिंकू भी बिल्लू को चाहती है ? शिला भईया और आशु की लड़ाई में जीत किसकी होगी? 

क्या चमन में बहार आ  पाती है ?  बिल्लू का प्रेम कस्बों के तमाम की लड़कों की तरह दम तोड़ देता है, रिंकू की याद दे जाता है या फिर चमन में बहार कायम रहती है?? 

यह जानना है तो देखिये "चमन- बहार"

आपका दिया हुआ एक घण्टा इक्यावन मिनट आपको एक नई दुनिया में ले जायेगा, गारंटी है.. 

तो देख डालिए.. अभी के अभी..